अच्छा हुआ जो रफीकों के जवाब नही आए,
सलीब पे लटकी हसरतों को ख्वाब नही आए।
जूनून-ऐ-जिंदिगी और उसके वोह सारे अज़ाब
क़दमों की आहट आती रही अहबाब नही आए।
तपते सेहरा और उनसे गुज़रती जिंदिगी,
धोके तो कई बार हुए; वो हुबाब नही आए ।
तेग्ज़नी अभी कुछ और बाक़ी रही हैदर* ;
खून-ऐ-वफ़ा सब तरफ़, रुबाब नही आए।
भावार्थ : रफीकों = दोस्तों के, सलीब= क्रॉस , ख्वाब= नींद/ ड्रीम
अहबाब= प्यारे दोस्त, हुबाब = बादल,
Teghzani = swordmanship, fencing.
Rubab= The ancient persian instrument of music containing numerous strings.

good and deep meditative thought frame
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