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Wednesday, February 25, 2009

"मेरा शीशा"

बात उस दौर की है जब मई बिल्कुल नया नया था
शीशे में उभरते हुए अक्सों का एहसास नया नया था
शीशा-ऐ-दिल था चमकदार; मगर आबाद न था।
था तो काबा मेरे पास मगर आबाद न था॥
जब भी कोई सूरत मेरे दिल के करीब आई
अक्स देख के अपना वो घरीब घबरायी...
शीशा नया -नया हो तो हर बात बता देता है
कोई कितने gilaaf ओढ़ ले ये जातबता देता है
सभी jante हैं के maykash अगर warid-ऐ-जाम हो,
फिर ज़रूरी नही के botal पे हमेशा ही नाम हो।
lab tar हुए ,यह may का नाम बता देता है;
are नाम क्या cheez है?
यह khamar का paam बता देता है
अक्स देखने waale जब भी मेरे शीशे से डर गए;
toda उसे fauran कुछ इस tarha...
के yaaro " हम मर गए"!!!!!!!!!!